Friday, 27 March 2020

Circuit Breaker in Indian Stock Market in Hindi


Circuit breakers बाजार में Trading को अस्थायी तौर पर रोकते हैं। यह Circuit breakers ना सिर्फ भारत के Stock Exchanges में लगते हैं बल्कि दुनिया के अन्य Stock Exchanges में भी लगते हैं। Circuit breakers को आप किसी Stock या Index में देखते हैं।

आप इस पोस्ट को learn share market in hindi पर पढ़ रहे हैं।

Rule

आप सोच रहे हैं कि यह Circuit breakers आखिर लगते कैसे हैं। मैं आपको यहाँ बता दूँ कि Circuit breakers पिछले दिन की Closing Price पर लगते हैं ।  

Stock में Circuit breakers

किसी भी Stock में जब पिछले दिन की Closing Price से Share की Current Price 20% या तो ऊपर चली जाती है या 20% नीचे आ जाती है तो उस Stock में Circuit breakers लग जाता है । यह Circuit कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों तक हो सकता है । जरूरी नहीं है की सभी Stock का Circuit breaker 20% पर ही लगेगा । अगर कोई Stock कई दिन से लगातार गिरता जा रहा है तो यह Exchange द्वारा घटाकर 10% या फिर 5% भी किया जा सकता है । लेकिन मैं आपको यह बता दूँ कि अगर Stock ऑप्शन और फ्युचर में ट्रेड करता है तो यह Circuit 20% के बाद 25% और फिर 30% पर लग जाता है और इस तरह से यह हर बार 5% बढ़कर अगला Circuit लगता रहता है । इस तरह से ऑप्शन और फ्युचर वाले Stock एक दिन में कितने भी बढ़ सकते हैं और कितने भी गिर सकते हैं परंतु बिना Future and Option के Stock दिन में 20% से ऊपर नहीं बढ़ या गिर सकते ।

Exchanges में Circuit breakers

जब Nifty या Sensex में से किसी भी Exchange पर पहले Circuit breaker लग जाता है तो दूसरे Exchange पर भी Trading रोक दी जाती है । कोरोना वाइरस के चलते 23 मार्च को Sensex 2991 अंकों की गिरावट के साथ जब 26,924 पर था तो ट्रेडिंग को रोकना पड़ा जबकि उस समय निफ्टी में सिर्फ 9.6% ही गिरावट थी ।
BSE या NSE में Circuit breaker तीन चरणों में लगते हैं । पहला 10% पर, दूसरा 15% पर और तीसरा 20% पर ।

Time Period of Circuit breakers on NSE and BSE

अगर Circuit दोपहर 01 बजे से पहले 10% पर लगता है तो Trading को 45 मिनट के लिए रोक दिया जाता है और अगर 10% वाला Circuit दोपहर के 01 बजे से 02:30 बजे के बीच लगता है तो Trading को 15 मिनट के लिए रोक दिया जाता है और अगर 02:30 बजे के बाद लगता है तो कोई Trading नहीं रोकी जाती ।
अगर Circuit दोपहर 01 बजे से पहले 15% पर लगता है तो ट्रेडिंग को 01 घंटा 45 मिनट के लिए रोक दिया जाता है और अगर 15% वाला Circuit दोपहर के 01 बजे से 02 बजे के बीच लगता है तो Trading को 45 मिनट के लिए रोक दिया जाता है और अगर 02 बजे के बाद लगता है तो कोई Trading नहीं होती , मतलब कि ट्रेडिंग को पूरी तरह से दिन के बचे हुए समय के लिए रोक दिया जाता है ।
दिन में कभी भी 20% पर Circuit लगने पर उस दिन के लिए Trading को बंद कर दिया जाता है ।
जब कभी भी Exchanges में 10% या 15% पर Circuit लगने के बाद Trading को रोका जाता है तो रुकावट वाले समय के बाद 15 मिनट का Pre Opening Session जरूर शुरू होता है जैसे हम सामान्य दिन के शुरुवात में 09 बजे से लेकर 09:15 बजे तक देखते हैं ।


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Tuesday, 30 October 2018

What is Dividend in Hindi? Dividend kya hota h ?

                Share Market in Hindi की इस Series में आप Dividend kya hota hai ? के बारे में पढ़ेंगे । क्योंकि बहुत सारे लोग सिर्फ उस Company में पैसा Invest करते हैं जो Company ज्यादा Dividend देती है । अगर आप भी अपने पैसे को Dividend के Base पर Invest करना चाहते हैं तो पहले ये जान लीजिए कि Dividend hota kya hai ? Dividend को Investors इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि इससे प्राप्त Income Tax Free होती है । अगर कोई Company ज्यादा Dividend Pay कर रही है तो इसका मतलब Company is Well (अच्छी) है और वो Good Profit Earn (कमा) कर रही है । अगर कोई Company लंबे समय से Dividend Pay कर रही है परंतु वह Dividend को कम करती जा रही है तो इसका मतलब Company का Profit कम होता जा रहा है और Company कभी भी घाटे में जा सकती है । और जब भी High Dividend Paying Company अपने Dividend को कम करती है तो इससे Shareholders को ऐसा लगने लगता है कि Company का Profit कम होता जा रहा है और वो shares को बेचना शुरू कर देते हैं जिससे Company के Share की Price नीचे चली जाती है । लेकिन यह जरूरी नहीं है कि अगर कंपनी Dividend को कम कर रही है तो वह संकट में हो, क्योंकि कई बार Company अपने उस पैसे को कहीं अच्छी जगह Invest करके अपने Bussiness की Growth में लगा देती है । 

Dividend कंपनी की कमाई का वह हिस्सा होता है जो Shareholders के बीच में बाँट दिया जाता है । Dividend को नकद (Cash) के रूप में, कंपनी के share या अन्य किसी रूप में दिया जा सकता है । लेकिन ज़्यादातर कंपनी नकद यानि कि Cash के रुप में ही Dividend देती है। कंपनियों के अलावा, कई mutual Fund और ETF (Exchange Traded Fund) भी Dividend देते हैं । 


दूसरे शब्दों में कहें तो, Dividend का अर्थ है लाभांश यानी कि लाभ का अंश । इसे Share पर लाभ भी कह सकते हैं । जब कंपनी को लाभ हो जाता है तो वो उस लाभ में से कुछ पैसा कंपनी की Growth में लगा देती है और कुछ पैसा उन Investor को देती है जिन्होंने कंपनी के Share खरीदे हैं। Dividend को Share की Face Value पर दिया जाता है ना कि Share की Market Price पर । 

               
     Company को जब Profit होता है तो Shareholders को Dividend दिया जाता है । यह भी जरूरी नहीं है कि हर Profit में रहने वाली कंपनी आपको Dividend देगी, वो इस पैसे को Company का Business Growth करने में भी लगा सकती है । कई बार Company बिल्कुल थोड़ा Profit होने पर भी Dividend दे देती है क्योंकि वे अपने नियमित Dividend देने के Record को बनाए रखना चाहते हैं । 
            Dividend कितने समय बाद और किस दर से देना है, यह सब Company के Director देखना होता है । 

क्या Dividend देने से Company पर असर पड़ता है ? - जी हाँ, Dividend देने से Company पर असर पड़ता है । क्योंकि यह पैसा Company के Bussiness से हमेशा के लिए बाहर हो रहा है ।

फिर दिमाग में एक सवाल उठता है कि Company Dividend देती क्यों    है ? -अगर कोई Company Dividend दे रही है तो समझा जाता है कि Company ठीक तरह से काम कर रही है और इससे Investor का Company पर विश्वास बना रहता है । अब सवाल दिमाग में यह उठता है कि Investor से Company को क्या फायदा है ? इस सवाल का उत्तर जानने के लिए आप



 कंपनी अपने Share क्यों बेचती है
वाली Post को पढ़ सकते हैं ।

इन्हें भी जरूर पढ़ें :
                          Stock Split क्या है ?
                         अगर शेयर बाजार में Loss हो गया है तो उसे कैसे Recover करें ?


Dividend से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण तारीखें
  1.  Announcement Date - इस दिन Company के Management द्वारा Dividend को Announce किया जाता है । 
  2. Ex-Dividend Date - यह वो तारीख या दिन होता है यदि उस तारीख के बाद और उसी तारीख वाले दिन यदि कोई Shareholder कंपनी के Share खरीदता है तो उसको Dividend नहीं मिलेगा । उदाहरण के लिए, मान लो Ex-Date 01 दिसम्बर है और कोई Shareholder 01 दिसम्बर को या उसके बाद अगर Company के Share खरीदता है तो उसको Dividend नहीं मिलेगा । 
  3. Record Date- यह वो तारीख होती है जिस दिन Company अपने Shareholders को यह बता देती है कि किस - किस को Dividend मिलेगा । 
  4. Payment Date - इस दिन Dividend का पैसा Shareholders के Bank Account में डाल दिया जाता है । 

Dividend की कुछ Main Term इस प्रकार हैं :


  1. Interim Dividend - जब कोई Company वर्ष के बीच में Dividend देती है तो उसे Interim Dividend कहते हैं 
  2. Final Dividend - यह Dividend वर्ष के अंत में दिया जाता है . 
  3. Special Dividend - कई बार Company Tax बचाने के लिए भी Dividend देती है, इसे Special Dividend कहते हैं . इससे कंपनी और Shareholders दोनों को फायदा होता है .
  4. Cum Dividend और Ex Dividend ये दोनों Dividend का संबंध एक निश्चित तारीख से होता है .

जब कोई Investor Ex Dividend Date से पहले यानि की एक निश्चित तारीख से पहले Shares को Buy करता है तो उसे Cum Dividend कहते हैं और वह Dividend का हक़दार होता है परन्तु जो Investors उस निश्चित Date के बाद अगर Shares को Buy करता है तो उसे Dividend नहीं मिलता . और इसे Ex Dividend कहते हैं . 

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Sunday, 24 June 2018

How To Recover Loss In Share Market in Hindi

दोस्तों, Business में पैसा लगाया है तो Profit/Loss तो होता ही रहता है । जिस तरह एक सिक्के के Head/Tail दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार Business के Profit/Loss दो पहलू हैं । Share Market में पैसे लगाकर हर कोई अमीर बनना चाहता है।  परंतु यह इतना आसान नहीं है, लेकिन मुश्किल भी नहीं ।



 समस्या तब आती है जब आप पैसे लगाकर रातों रात अमीर बनने की सोचते हैं और फिर अमीर बनना तो दूर, आप पहले से और भी गरीब बन जाते हैं । मान लो आप 50,000 से कोई किरयाने की दुकान खोल रहे हैं, क्या आप उस पैसे से एक दिन या एक सप्ताह में ही लखपति हो जाएंगे, नहीं ना । ठीक उसी प्रकार आप को Share Market में भी निवेश करके इंतजार करना होता है ।




आप निम्न तरीकों को अपनाकर अपने Loss को रोक सकते हो और साथ में How To Recover Loss In Share Market का उत्तर भी जान सकते हो ।

Rules :

  1.   अपनी सोच पर लगाम लगाएँ - जी हाँ, आप सोचते हैं कि मैंने जो 20,000 लगाया है उसको मैंने 10 दिन में या 15 पंद्रह दिन में दोगुना , तिगुना करना है । इस दोगुने, तिगुने के चक्कर में आप High Risk Trade लेते हो । इस High Risk से जैसे पैसा आता है, उसकी दोगुनी रफ्तार से जाता है । दोगुनी रफ्तार कैसे ? आप सोच रहे होंगे, यार इस लेखक का दिमाग सटक गया है क्या ? चलो में उस दोगुनी रफ्तार के बारे में आपको बता दूँ  । मान लो, आपने किसी Script में 5000 रुपए लगाए है, और आपको 50% Loss हो गया है, इसका मतलब आपके पास सिर्फ 2500 रुपए ही बचे हैं । अब इसी पैसे से दोबारा 5000 बनाने के लिए आपको 100% profit चाहिए किसी भी Script में । देखो अब, कोई भी Script जब 50% गिर गई तो आपका पैसा भी आधा हो गया । अब आपके पैसे तभी पूरे होंगे जब कोई Script अपनी Price की दोगुनी हो जाएगी । 
  2. Advisory का चक्कर - दोस्तों, अगर अच्छी Advisory मिल जाए तो आपके पैसे को Recover बड़ी जल्दी से करवा सकती है । लेकिन आजकल 99% Fraud हैं । इसलिए इन सबसे दूर रहिए । कुछ Advisory आपको शुरू में Profit करवा देती हैं और जब आप उनके पास Registration कर लेते हैं तो फिर वो आपको Loss करवा देते हैं । जब आप उनको बोलोगे तो वो कहेंगे Sir/Madam ये तो Market है कुछ भी कर सकती है । ये आपको Loss इसलिए करवा देती है क्योंकि फिर आप उस Loss की Recovery में उन्ही के Touch में रहते हो । कुछ Advisory तो 10 व्यक्तियों में से 5 को वही Script Buy करवाती है और 5 को वही Sell. अब जिन 5 व्यक्तियों की सही निकली वो सोचते हैं कि यार इनको तो पता है और वो उनके पास रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं । 
  3. पैसे को Invest करिए - आप अपने पैसे को ट्रेडिंग की बजाए इन्वेस्ट करिए । क्योंकि ट्रेडिंग में ज्यादा से ज्यादा संभावना Loss की ही रहती है । इसलिए आप अपने पैसे को Trading की बजाए Investing में लगाए ।

    दोस्तों, ट्रेडिंग में तो बैंक के बैंक खाली हो जाते हैं, इसलिए फिर आप और मैं क्या कर सकते हैं । आपने अगर ध्यान दिया हो तो बड़े से बड़े लोग भी Investing करते हैं । हाँ , अगर आपने ट्रेडिंग करनी है तो आप अपने पैसों में से कुछ ही पैसे ट्रेडिंग में लगाइए, ज्यादा तो इन्वेस्टिंग में ही लगाए । 
  4. ट्रेडिंग का बाप Stoploss - सही पढ़ा आपने । अगर आप ट्रेडिंग करना ही चाहते हैं तो Stoploss लगाकर Trading करें । बिना Stoploss लगाएँ, आप कुछ ही मिनटों में अपना Account साफ करवा सकते हैं । जिस तरह हेल्मेट हमारी Bike पर और Seatbelt हमारी कार में रक्षा करते हैं तो उसी प्रकार Stoploss हमारी Share Market में रक्षा करता है । अब हेल्मेट पहने हुए व्यक्ति को जिस प्रकार मामूली सी चोट लग जाती है और वो बड़ी चोट से बच जाता है, ठीक उसी प्रकार Stoploss से हमें कुछ Loss हो सकता है मगर Account साफ होने से बच सकता है । 
  5. समय कहीं नहीं जाता - कुछ व्यक्तियों को Market शुरू होते ही Trade लेने की आदत होती है । उनको ऐसे लगता है कि कहीं ये स्टॉक मेरे हाथ से न निकल जाए और फिर थोड़ी ही देर में वो Stock या तो उसकी Trade के Opposite चल पड़ता है या फिर अगर वो थोड़ी देर ओर रुकता तो उसको वो अच्छी Price पर मिल जाता । इसलिए दोस्तों, इस Market को यहीं रहना है, कृप्या करके आप जल्दी में Trade लेने से बचें । इस Market में आज का समय खत्म हो गया तो क्या? यह तो आपके उम्र भर रहेगी, हाँ हो सकता है फिर आपके पास Invest करने का पैसा ना रहे । इसलिए इस जल्दी वाले अपने मिज़ाज को बदलिए । 
  6. Indicator में Perfection - दोस्तों, आपने कई Indicators के साथ Trading की होगी । उनके साथ आप कभी Profit तो कभी Loss में भी रहे होंगे । लेकिन आपको सारे Indicators जानने की बजाए, सिर्फ कुछ में ही महारत  हासिल करनी है । अगर आप सिर्फ कुछ Indicators में Perfect हो तो सिर्फ उन्हीं के Base पर Trade लीजिए । कभी भी Single Indicator के Base पर भी ट्रेड ना लें, जब आपके दो या तीन Indicators से संकेत मिल रहा है तो ट्रेड लें । आप ज्यादा से ज्यादा 5 Indicators में Perfection लाइए । 
  7. Market के साथ स्ट्रेटजी बदलिए - जी हाँ , दोस्तों । आपको बाजार के साथ अपनी स्ट्रेटजी में भी बदलाव लाना होगा और कभी भी आप अपनी स्ट्रेटजी दूसरों को मत बताना । क्योंकि जब ज्यादा संख्या में लोग उसी स्ट्रेटजी को प्रयोग करेंगे तो मार्केट अपने आप को बदल लेगी और फिर वो स्ट्रेटजी आपकी काम नहीं करेगी । क्योंकि अगर हर कोई पैसे कमायेगा तो पैसा आएगा कहाँ से । 
  8. In Which Share I Invest the Money - किस Share में पैसे Invest करें । दोस्तों, यह तो Market का सबसे बड़ा प्रश्न है । लेकिन मैं आपको यहाँ इसका उत्तर देने की कोशिश जरूर करूँगा। अगर आपने Invest करने की ठान ली है तो सबसे पहले किसी एक कंपनी के बारे में दस - पंद्रह दिन तक सारी जानकारी निकाल लें। कौन इसका Promoter है, कहाँ कहाँ Company की Buildings हैं , किस Sector में है और कौनसे स्थान पर है । इसकी सालाना बिक्री कितनी है और खर्चे कितने हैं । Company Management कैसा है आदि । क्या कंपनी का Share सही Price पर Trade कर रहा है या इंतजार करने की जरूरत है । इन सबको जानने के बाद ही किसी भी कंपनी में अपने पैसे को Invest करिए । 
  9.  खुद के नियम बनाइए - दोस्तों, आपका पैसा है तो आपके खुद के नियम भी होने चाहिए । बिना Rules के Trade ही मत लें । आप अपने नियमों में कितनी प्रतिशत का Stoploss और कितनी प्रतिशत पर Target रखना है । कितनी Amount एक Stock में Invest करनी है आदि आदि बना सकते हैं । 

  ब्लॉग पर Trading Calls का Option दिया हुआ है । अगर आप चाहे तो वहाँ से देखकर भी Trade कर सकते हैं । लेकिन हो सकता है इसमें मेरा Personal Investment भी हो और नही भी । इसलिए आपका अपना पैसा है इसको खुद के रिस्क पर ही Invest करिए ।


कृप्या करके आप अपना सुझाव भी Comment के माध्यम से दें । 

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Tuesday, 26 September 2017

कंपनी अपने Share जनता को क्यों बेचती है और क्या Stock Market जुआ है ?


Share Market जुआ नहीं है दोस्तों । अगर आप जानते हैं कि शेयर क्या होता है तो आप लगातार इस पोस्ट को पढ़ते रहे,  अगर आपको मालूम नहीं है तो आप पहले शेयर क्या होता है वाली पोस्ट पढ़ें ।  बाद में इस पोस्ट को पढ़ें । 
             सबसे पहले आते हैं हम First Question पर । दोस्तों कंपनी को Grow करने के लिए पैसे की जरूरत होती है, अगर कंपनी ये पैसे Bank से लेगी तो कंपनी को इस पैसे पर ब्याज देना पड़ेगा । कंपनी इस ब्याज से बचने के लिए पैसे जनता से लेती है । कंपनी जनता को अपने शेयर बेच देती है और कंपनी को बदले में पैसे मिल जाते हैं । यही कारण है कि कंपनी अपने शेयर जनता को बेच देती है । परंतु अब आपके दिमाग में आया होगा कि कंपनी ये शेयर बैंक को भी तो बेच सकती थी । दोस्तों हमारे देश में बहुत बड़ी संख्यां में कंपनी हैं तो बैंक सभी के शेयर तो खरीद नहीं सकते तथा दूसरी बात यह होती है कि बैंक अपने पैसे पर ज्यादा Risk भी नहीं लेते ।



     अब बात करते हैं कि शेयर बाजार जुआ नहीं है । दोस्तों, जब लोग Stock Market में पैसे नहीं कमा पाते तो इस Market को जुआ का नाम दे देते हैं । कुछ लोग इसको सट्टा बाजार भी कहते हैं । दोस्तों, जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह हर Business के भी दो पहलू होते हैं - Loss And Profit. 
     अब मान लो हम खेती करते हैं, इसमें भी Loss and Profit दोनों होते हैं । अगर किसी प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब हो जाती है तो Loss हो गया और जब Rate अच्छे ना आए तब भी Loss हो जाता है । इसी तरह इसके विपरीत होता है, जब Rate अच्छा हो और फसल ज्यादा हुई हो तो Profit हो जाता है ।
       इसी प्रकार दूसरे Business में Loss And Profit होता है । दोस्तों किसी भी Business को करने से पहले उसके बारे में जानना जरूरी होता है । अगर हम किसी भी Business को बिना समझे करेंगे तो एक चीज़ तय होती है जिसको Loss बोलते हैं ।
दोस्तों, कुछ लोग बिना समझे और बिना किसी Study के इस Market में आ जाते हैं, जब इसमें उनको Loss हो जाता है तो Share Market को बदनाम करने के लिए इसे जुआ का नाम दे देते हैं ।

     दोस्तों, मैं आपको एक ऐसा मंच देना चाहता हूँ जिस पर आप Basic के साथ-साथ Advance भी सीख जाएंगे । इसके लिए आप इस Blog को Bookmark भी कर सकते हैं ।


  

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Friday, 22 September 2017

Bulk Deal And Block Deal

Adding Borders and Paddings to HTML Tables



आज की मुख्य  Bulk Deal तथा Block Deal जो कि NSE पर हुई है का विवरण इस प्रकार है :-

Date Symbol Security Name Client Name Buy/Sell Quantity Traded Average Price

इन्हें भी पढ़ें





Bulk डील होती क्या है जानने के लिए नीचे का Content पढ़ें :-


Block Deal का Starting Time 09:15 होता है तथा Closing Time 09:50 होता है । इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी कंपनी के अंदर Block Deal होनी है तो यह 09:15 से लेकर 09:50 के बीच में हो जाएगी । यह Trading Window के अंदर नहीं होती । इसका अर्थ यह है कि यह Deal हमें Screen पर दिखाई नहीं देती । यह Deal ट्रेडिंग Window के Background में होती है । परंतु Bulk Deal ट्रेडिंग Window के अंदर होती है ।

अब बात करते हैं कि आखिर Block Deal और Bulk Deal है क्या ?

Block Deal में जो Share ट्रेड होते हैं उनकी संख्यां 5 लाख से अधिक होनी चाहिए  या फिर Share Transaction Value 5 करोड़ से अधिक होनी चाहिए । Block Deal पिछले दिन के Closing Price के 1% ऊपर या नीचे या Market Price means Current Price पर हो सकती है । क्योंकि यह Trading Window के अंदर नहीं होती, इसलिए इन शेयरों की खरीद बिक्री हमें Trading Window पर दिखाई नहीं देती ।



Bulk Deal का आप Trading Window को देखकर आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं क्योंकि Trading Window में हम रोज Volume देखते हैं, अगर उस दिन ज्यादा Volume है तो हमें आसानी से पता चल सकता है कि यहाँ पर कोई Bulk Deal हुई है । Bulk Deal में कम से कम  0.5% शेयरों की खरीद बिक्री होती है । अगर आप किसी कंपनी के कुल शेयरों की संख्यां जानते हैं तो हम Bulk Deal में  कम से कम कितने Share Participate करेंगे, यह आसानी से पता लगा लेंगे ।

अगर आप NSE पर Bulk Deal या Block Deal के बारे में जानना चाहते हैं तो यहाँ Click करें  Bulk Deal / Block Deal 

बड़े निवेशक जो होते हैं वो 0.5% से नीचे शेयरों को खरीदते हैं ताकि कोई Bulk Deal ना हो और फिर जब उन्होंने आम जनता को दिखाना होता है तब वे Last में जाकर ( उन्होने जितने शेयरों को खरीदना था खरीद लिया होता है ) Bulk Deal करते हैं । यहाँ पर पार्टी खत्म हो गई होती है लेकिन Retail Investor को लगता है कि यहाँ पर तो Party अभी शुरू हुई है । आम जनता बड़े investor की Bulk Deal देखकर खरीदने लग जाती है और इस तरह शेयर की कीमत बढ़ती जाती है लेकिन इस बढ़ी हुई कीमत पर जहां Retail Investor जहां Entry कर रहा होता है, वहीं बड़ा investor अपने शेयरों को 0.5 % से नीचे शेयरों को बेचने लग जाता है ताकि कोई Bulk Deal न बन जाए । और फिर अंत में, बड़ा निवेशक अपने सारे शेयरों को एक Bulk deal के जरिए बेच देता है । फिर आम जनता उनकी इस Deal को देखकर शेयरों को बेचना शुरू कर देती है और वही बड़ा निवेशक इस घटी हुई कीमत पर शेयरों को Accumulate करना मतलब कि शेयरों को खरीदना शुरू कर देता है ।
यही कारण है कि हमें वैसे ही किसी बड़े निवेशक की Bulk Deal को देखकर Buy या Sell नहीं करना चाहिए ।

कई निवेशक जो होते हैं वो Volume Breakout के आधार पर शेयरों की खरीद - बिक्री करते हैं । उनको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह Breakout किसी Bulk Deal /Block Deal के कारण न हुआ हो ।
Delivery % तथा Volume Analysis जो होता है वो Bulk Deal के Case में काम नहीं करता । 

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Thursday, 13 July 2017

what is stock split ? What is Dividend?


मान लो ABC कंपनी के शेयर की कीमत 1000 रुपए है । इतनी ज्यादा कीमत होने के कारण कुछ लोग इतने महंगे शेयर को खरीद नहीं पाते । अगर शेयर की कीमत कम हो जाती है तो उस कंपनी के शेयर को खरीदने वालों की संख्यां में बढ़ोतरी हो सकती है ।
मान लो अजय के पास ABC कंपनी के 1000 की कीमत पर 100 शेयर हैं । कंपनी stock split का option लेकर आती है । मान लो कंपनी 1:1 में स्टॉक को split करती है ।
अब stock split होने के बाद अजय के पास ABC कंपनी के 200 शेयर हो जाएंगे लेकिन जो शेयर की कीमत है वो भी आधी हो जाएगी ।
लेकिन इन दोनों स्थितियों में अजय की investment same रहती है ।
stock split होने से पहले -
100 शेयर X 1000 शेयर की कीमत = 100000 अजय की टोटल investment
stock split होने के बाद -
200 शेयर X 500 शेयर की कीमत = 100000 अजय की टोटल investment
stock split की कुछ भी Ratio हो सकती है, जैसे - 1:1, 2:1, 3:1 , 4:1
stock split का stock के fundametal पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । स्टॉक split कंपनी को लाभदायक दर्शाता है ।



Reverse split - यह stock split के बिल्कुल opposite होता है । यह दर्शाता है कि कंपनी की condition खराब है और यह अपने शेयर की कीमत बढ़ा कर कुछ लोगों को आकर्षित करना चाहती है क्योंकि वो लोग शेयर की कीमत तो देख लेते हैं की शेयर की कीमत ज्यादा हो गई है, लेकिन वो यह नहीं देखते कि शेयर की कीमत में कैसे वृद्धि हुई है । जिस investor के पास कंपनी के शेयर थे, उसके शेयरों की संख्या Reverse split होने के बाद कम हो जाती है ।

 Dividend क्या होता है ? 
कंपनी अपने profit का कुछ हिस्सा shareholders के साथ बांटती है, उसे Dividend कहते हैं । फिलहाल 10 लाख तक के Dividend पर कोई Tax नहीं लगता ।
अगर कोई कंपनी अब तक Dividend दे रही है तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि कंपनी भविष्य में भी Dividend देती रहेगी ।
कंपनी जो Dividend देती है, वो Face Value पर दिया जाता है । अगर 10 Rs. की Face Value वाली Company 200% Dividend दे रही तो इसका मतलब वह 20 रुपए प्रति शेयर Dividend दे रही है ।

Dividend के बारे में और ज्यादा जानकारी के लिए आप  यहाँ Click करें । 

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What is Leverage in market in Hindi

leverage kya hota h, Hindi me padhe

 मान लो आपके पास 10000 रुपए हैं । आप 200 रुपए की कीमत के 50 शेयर खरीद सकते हैं, उसी दिन शेयर की कीमत 210 रुपए हो गई, तो आपको उस दिन 500 रुपए का लाभ हुआ ।
कुछ Broker intraday के लिए 20 गुणा, कुछ 15 गुणा और कुछ 10 गुणा Leaverage देते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आपका Broker जितना गुणा आपको Leverage देता है, आपकी Amount उतने गुणा हो जाती है और फिर आप उस हिसाब से अपने शेयर खरीद सकते हैं ।
मान लो आपका ब्रोकर आपको 20 गुणा Leverage देता है तो आपकी राशि 10000 का 20 गुणा करने पर 2 लाख हो गई । अब आप 200 रुपए की कीमत वाले 1000 शेयर खरीद सकते हैं और फिर शेयर की कीमत 210 होने पर जब आप अपने शेयर को बेचेंगे तो आपको 10 हजार का लाभ हुआ ।
यह सब Leverage लेने पर फायदा हुआ । अब आप समझ गए होंगे कि Leverage में आप अपने Trading Account में कम राशि होने पर भी ज्यादा शेयर खरीद खरीद सकते हैं ।



अब प्रश्न् मन में यह उठता है कि Leverage लेने के लिए ब्रोकर को कोई Extra Charge या कोई Document भेजना पड़ता है क्या ?
जी नहीं, दोस्तों । ना तो आपको कोई अतिरिक्त राशि देनी पड़ती है और ना ही आपको कोई Document भेजने की जरूरत पड़ती है । आपका Trading Account खुलने पर ये सब सुविधा आपको अपने आप मिल जाती है ।

ब्रोकर Leverage क्यों देता है और क्या Beginner को Leverage लेकर Trading करनी चाहिए ?
ब्रोकर अपने कस्टमर को Intraday के लिए इसलिए Leverage देता है क्योंकि इससे उसकी Brokerage बनती है ।
Beginner को Leverage लेकर Trading नहीं करनी चाहिए क्योंकि आप ज्यादा मुनाफे के चक्कर में ज्यादा नुकसान कर बैठेंगे । जब आप Indicator, Candlestick Pattern और Stoploss के बारे में सीख जाएंगे तब आप Leverage लेकर काम कर सकते हैं ।

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What is IPO ? आइ पी ओ (IPO) क्या है?


जब किसी कंपनी को कोई भी कार्य करने के लिए पैसे की जरूरत होती है तो वह listed होकर जनता से पैसे ले सकती है । इसे IPO(initial Public Offer) कहते हैं ।  जब कंपनी IPO लेकर आती है तो उस IPO की कुछ दिन तक वैधता होती है जिसमें कोई भी व्यक्ति उस कंपनी के शेयर खरीदने के लिए Apply कर सकता है । लेकिन जहां तक हमें पता है IPO में FII  निवेश नहीं कर सकते हैं । IPO Market को Primary Market कहते हैं ।
                  IPO के दस-बारह  दिन बाद कंपनी NSE या BSE या दोनों में listed हो जाती है और जिनको IPO वाले शेयर मिल चुके हैं वो व्यक्ति कंपनी के लिस्ट होने के बाद अगर शेयरों को बेचना चाहे तो वह बेच सकता है । IPO के बाद कंपनी अपने शेयरों को Investor में बांट देती है, इसको Allotment of Share कहते हैं। कंपनी के list होने के बाद जब शेयरों की खरीद बिक्री शुरू हो जाती है तो इसे ‘Secondary Market’ कहते हैं । इसमें कोई भी नया निवेशक जिसने IPO में कंपनी के शेयर नहीं खरीदे थे तो वह भी शेयरों को खरीद और बेच सकता है । IPO में निवेश करने से पहले आपके पास Demate Account का होना जरूरी है । यह किसी प्राइवेट कंपनी का पब्लिक कंपनी की राह पर पहला कदम होता है । इसके बाद प्राइवेट कंपनी पब्लिक कंपनी में बदल जाती है ।
IPO के समय कंपनी की मर्जी होती है कि वह Investor से पूरा पैसा एकदम मँगवाए या किस्तों के रूप में मँगवाए । अगर कंपनी किस्त के रूप में पैसा लेती है तो कंपनी को सारा पैसा एक साल के अंदर मंगवाना होता है तथा हर एक किस्त के बीच में कम से कम एक माह का अंतराल होना जरूरी है ।



 

what are the points to note before investing in an IPO ?    IPO में निवेश करने से पहले जरूरी बातें क्या होती हैं ?


सबसे पहले तो यह देखें की यह कंपनी किस Sector से संबन्धित है । उदाहरण के लिए Auto Sector, IT Sector, Pharma Sector आदि । और वह Sector आज के समय में कैसा Perform कर रहा है और भविष्य में कैसे Perform कर सकता है ।

कंपनी का प्रोमोटर कौन है और उसका रिकॉर्ड कैसा है । क्या वह किसी और कंपनी का भी प्रोमोटर है, अगर है तो उस कंपनी का वित्तीय कार्य कैसा चल रहा है कहीं वह कंपनी घाटे में तो नहीं चल रही ।
कंपनी IPO द्वारा जुटाई गई पूँजी को कहाँ निवेश करेगी ।
आजकल रेटिंग एजेंसियाँ भी IPO वाली कंपनी को रेटिंग देती है, ये रेटिंग एजेंसियां कंपनी के undamental चेक करके रेटिंग देती है, इससे भी निवेशक को फायदा हो सकता है । परंतु रेटिंग एजेंसी पर ना भरोशा करके आपको खुद कंपनी के Fundamental चेक करने चाहिए ।

Types of IPO Subscription

Subscription का मतलब है कि कंपनी अपने जितने शेयरों को जनता को Issue कर रही है, उसके मुकाबले में जनता कितने शेयरों के लिए आवेदन कर रही है । 
Subscription तीन प्रकार का होता है-
1.Fully Subscribe - कंपनी जितने शेयरों को जनता को Issue कर रही है, जनता ने भी उतने ही शेयरों के लिए आवेदन किया है।
2. Over Subscribe - कंपनी जितने शेयरों को जनता को Issue कर रही है, जनता Issue शेयरों की संख्या से ज्यादा के लिए आवेदन कर रही है।
3. Under Subscribe - कंपनी जितने शेयरों को जनता को Issue कर रही है, जनता Issue शेयरों की संख्या से कम के लिए आवेदन करती है ।

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What is Right Issue? What is Bonus Share?

 Share Market in Hindi की इस Series में आप Right Issue in Hindi और Bonus Share in Hindi के बारे में सीखोगे  अगर आप stock market में नए निवेशक हैं तो यदि आपको Bonus Issue या Right issue ना समझ में आए तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि जब आप Share Market 4 में अपना समय बिताएँगे आपको इनकी समझ आती जाएगी ।
What is Right Issue ?
Right Issue क्या है – कंपनी जब अपने विद्यमान शेयरधारकों को ही नए शेयर खरीदने का अधिकार देती है तो उसे Right Issue कहते है । इसमें कंपनी के शेयर की कीमत को बाजार भाव से कम या बाजार भाव पर ही विद्यमान शेयरधारक को नए शेयर खरीदने का मौका दिया जाता है । परंतु यह जरूरी नहीं है कि विद्यमान शेयरधारक Right Issue के लिए Apply करे, यह उसकी मर्जी होती है । नया निवेशक बाजार भाव पर तो खरीद सकता है परंतु Right Issue के द्वारा नहीं खरीद सकता ।



what is Bonus Share?
मान लो ABC कंपनी को बहुत ज्यादा लाभ हुआ । कंपनी ने इस लाभ को अपने कुछ कार्यों में लगाया जैसे नए project खरीदने में , नई ब्रांच शुरू करने में । कार्यों में लगाने के बाद जो पैसा बच गया कंपनी के पास उसको कंपनी ने शेयर में बदल दिया । कंपनी ने इन शेयरों को अपने शेयरधारकों में बाँट दिया । इन शेयरों को ही बोनस शेयर कहा जाता है । इस प्रक्रिया में कंपनी के शेयरधारकों की संख्यां में कोई बदलाव नहीं होता है और इसका सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इस लाभ का सरकार को Tax नहीं देना पड़ता ।
उदाहरण के लिए, तन्मय के पास ABC कंपनी के 1000 शेयर थे । अब उसकी कंपनी को फायदा हुआ तो कंपनी ने बोनस शेयर देने का ऐलान कर दिया । इन बोनस शेयरों को कंपनी ने अपने सभी शेयरधारकों में बाँट दिया, मान लो अब तन्मय को 48 शेयर मिले तो तन्मय के पास कुल 1048 शेयर हो गए । इस प्रकार कंपनी को profit होने पर तन्मय को भी लाभांश के रूप में 48 शेयर free में दिए गए ।

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शेयर की कीमत कैसे ऊपर नीचे होती है ? How share price go up or down?


 शेयर को खरीदने वाले ज्यादा हो तो शेयर की कीमत बढ़ती जाती है और जब शेयर को बेचने वाले ज्यादा हो तो कीमत घटती जाती है । अगर कंपनी का तिमाही , छमाही या वार्षिक परिणाम बढ़िया आ जाए तो शेयर की कीमत बढ़ती जाती है और अगर परिणाम गंदा आ जाता है तो शेयर की कीमत घटती जाती है ।
अगर कोई प्राकृतिक घटना घट जाए जैसे बाढ़ आना , सुनामी आना , भूकंप आना आदि तथा आंतकवादी attack आदि से भी शेयर की कीमत पर प्रभाव पड़ता है क्योंकि इन सभी से देश की Economy पर प्रभाव पड़ता है ।
कुछ International Factor से भी शेयर पर प्रभाव पड़ता है । कुछ इंटरनेशनल Factor हैं - किसी दूसरे देश में चुनाव , कच्चा तेल (Crude Oil), आंतकवादी अटैक, Dollar Index का ऊपर नीचे होना आदि ।

ज़्यादातर किसी भी Stock की Price का ऊपर नीचे होना Demand and Supply पर निर्भर करता है । Demand and Supply के कारण किसी भी चीज की कीमत पर प्रभाव पड़ता है, यह हम रोजमर्रा की जिंदगी में भी देख सकते हैं ।



इसको हम एक Practical Example की मदद से देखते हैं । भारत में पहले बकरी का दूध मुश्किल से ही कोई खरीदता था और अगर खरीदता था तो उस दूध की कीमत 40 रुपए से ही नीचे थी लेकिन जब डेंगू का रोग फैला तो उसी एक किलो दूध की कीमत 2000 रुपए तक हो गई थी क्योंकि डॉक्टर ने बकरी का दूध डेंगू में लाभदायक बताया था

इस प्रकार जब बकरी के दूध की Demand हुई और मुश्किल से मिलने लगा तो उसकी Price बढ़ती गई । Supply के Case में भी ऐसा ही होता है । जब बेचने वाले ज्यादा हो जाते हैं और खरीदने वाले कम तो Price का गिरना स्वाभाविक ही   है ।
कई बार Demand and Supply को Artificial तरीके से भी Generate किया जाता है, जिससे की नए नए Trader उनके जाल में फंस जाते हैं । जो बड़े - बड़े Investor होते हैं वो कम Volume वाले किसी भी Stock में Artificial Demand को दिखाते हैं और नए Trader उनके इस जाल में फंस जाते हैं और Stock की इस बढ़ी हुई Price पर Share खरीदते रहते हैं तथा बड़ा Investor अपने Share इस High Price पर बेचकर बाहर निकलता रहता है । बड़े Investor के पास शेयरों की संख्या ज्यादा मात्रा में होती है जिसके कारण वह अपने बचे हुए शेयरों के द्वारा Share Price को नीचे ले आता है । जो नया Trader था वो कुछ दिन या कुछ महीने अपने Share की Price का ऊपर आने का इंतजार करता है, मगर जब नहीं आती तो वह Share की कम Price पर ही अपने Share बेचकर बाहर निकल जाता है और फिर बड़ा Investor शेयर की इस कम कीमत पर अपने शेयरों को खरीदना शुरू कर देता है ।

इस प्रकार शेयर की कीमत Demand and Supply पर तो निर्भर करती है परंतु कई बार हम इस Artificial Demand and Supply के चक्कर में फंस जाते हैं । हमें उस Share में Invest करना चाहिए जिसमें ज्यादा Volume होता हो । 

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Why should know these questions answer share market beginners? Share Market Basics for Beginner in Hindi

दोस्तों शेयर बाजार में निवेश करने से पहले आपके  दिमाग में अक्षर जो प्रश्न उठते हैं यहाँ पर उन प्रश्नों का उत्तर देने की कोशिश की गई है । यदि फिर भी आपका प्रश्न रह गया है तो आप comment के माध्यम से पूछ सकते हैं । 
How is stock market ? शेयर मार्केट कैसा बिजनेस है ?

यह एक अच्छा business है, आपने सहारा या LIC या और कोई किस्त भी भरी होगी तो वो आपके पैसे stock market में ही लगाते हैं । आप इसको घर बैठे ही कर सकते हैं । इसमें आप खुद ही बॉस हैं। वारेन बफ्फेट , राकेश झुनझुनवाला ये सब stock मार्केट के हीरो कहे जाते हैं ।

Qualification (योग्यता )

इसके लिए किसी  Degree की जरूरत नहीं पड़ती । मतलब कि इसके लिए आपको किसी भी प्रकार की Graduation की Degree नहीं चाहिए ।





Document Require for Opening Account in Share Market? शेयर मार्केट में खाता खुलवाने के लिए Require दस्तावेज़ ?
अगर आपने share मार्केट में invest करने का मन बना लिया है तो फिर आप निम्नलिखित Document तैयार कर लीजिए :-
  1. PAN Card 
  2. आधार Card या वोटर Card 
  3. पिछले 6 महीने की Bank Detail  
  4. 2 फोटो 
शेयर बाजार में खाता खुलवाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर click करें 






शेयर मार्केट में फायदा कैसे होता है ? How we earn from stock market?

मान लो हम शेयर मार्केट में 5000 रुपए से शुरुवात करते हैं और किसी ABC कंपनी की शेयर Price 20 रुपए है तो हम 5000 रुपए में ABC कंपनी के 250 शेयर खरीद सकते हैं । अब मान लो कुछ समय बाद ABC कंपनी की शेयर Price 25 हो गई तो हम उन 250 शेयर को बेच देंगे और इस प्रकार हमारा Profit हो जाएगा ।
invested value = 5000
company stock price=20
number of share price=250

when company stock price=25 then sale
so current value=25X250=6250

Profit=6250 - 5000=1250

Minimum Amount to Invest in Share Market? कम से कम कितनी पूँजी Share Market में लगायें ?

जब मैं Share Market के बारे में किसी से बात करता हूँ तो सबसे पहला प्रश्न जो सुनने को मिलता है वो ये है की Sir कम से कम कितनी Amount (राशि ) से हम Share Market में शुरुवात कर सकते हैं ।





 Share Market में पैसे की कोई भी Limit कम (Minimum) या ज्यादा (Maximum) नहीं होती । इसमें आप किसी Company का 1 रुपए में भी Share खरीद सकते हो और किसी Company का 50,000 रुपए में भी 1 Share खरीद सकते हो ।
इसका मतलब यह हुआ कि हर एक Company के share की Price अलग-अलग होती है ।
लेकिन कई Brokerage Firm आपको 5000 रुपए से शुरुवात करने के लिए बोलती हैं ।

दोस्तों अगर Share Market से Related कोई भी प्रश्न आपके मन में है तो आप नीचे Comment Box में लिखकर उसके बारे में जानकारी ले सकते हैं ।


How to Trade Online ?  
Online शेयरों को कैसे खरीदें और कैसे बेचें ?

शुरू में आपको facebook और whatsapp का भी ज्ञान नहीं होगा और जब आप उस पर समय बिताते हैं तो आपको knowledge हो जाती है । उसी प्रकार जो ब्रोकर का software होता है , उसकी भी आपको नॉलेज हो जाएगी ।


After opening account, how to learn share market? स्टॉक मार्केट में खाता खुलवाने के बाद कहाँ से सीखें ?



शेयर बाज़ार में खाता खुलवाने के बाद सीखने के साधन :-

1. learn from internet. इंटरनेट पर भी आप सीख सकते हैं ।
2. learn from share market TV channel. शेयर मार्केट वाले टीवी चैनलों से भी आप सीख सकते हैं । 
3. learn from magazine and newspaper. पत्रिका और समाचार पत्रों के माध्यम से भी आप सीख सकते हैं ।

दोस्तों, internet पर सबसे अच्छी तरह शेयर बाज़ार सीखने का साधन हमारा अपना Blog ही तो है । आप सब दोस्तों की वजह से यह हर रोज तरक्की कर रहा है । 
इसके लिए आप सब का दिल से धन्यवाद । 

क्या Job वाला व्यक्ति भी Share Market कर सकता है ?

अगर आप Job करते हैं और Share Market में Invest  (निवेश) करना चाहते हैं तो आप Share Market में Invest कर सकते हैं इसके लिए आपको Job छोड़ने की जरूरत नहीं है । क्योंकि बहुत से Broker आपको AMO का option देते हैं ।

 शेयर बाजार में entry के लिए आपको Job छोडने की जरूरत नहीं है । शेयर बाजार में आप एक बार शेयर को Buy/sell का order डालकर आप जो भी काम करना चाहे कर सकते हैं ।
AMO क्या होता है :


AMO का मतलब  After Market Order होता है । इसका मतलब यह हुआ कि आप Market बंद होने के बाद आप अपना Order भर सकते हैं और यह Order अगले दिन Execute होगा ।
लेकिन अगर आपके पास समय नहीं है तो आप दिनभर में होने वाली stock की movement से अछूते रह सकते हैं ।
अगर आप Market में Job के साथ Invest करना चाहते हैं तो invest कर सकते हैं लेकिन Trading करने के लिए आपको समय चाहिए ।
Investing और Trading में अंतर 
Investing का मतलब लम्बे समय के लिए निवेश करना होता है । यह समय 6 महीने , 1 साल , 2 साल या इससे भी अधिक हो सकता है ।
Trading का मतलब उसी दिन ( Intraday ) या थोड़े समय के लिए निवेश करना होता है ।

क्या शेयर मार्केट से कोई व्यक्ति करोड़पति बन सकता है ?  Is there possible to be Millionaire in stock market ?


जी हाँ , दोस्तों । शेयर मार्केट के द्वारा आप आसानी से करोड़पति बन सकते हैं । बस जरूरत है तो आपकी लगन और मेहनत की । जैसे जैसे आप इसमें समय बिताते जाएंगे, आपको शेयर मार्केट की knowledge आती जायेगी और आप expert बनते जायेंगे ।
हम आपको एक उदाहरण से बताते हैं - R K Dhamani जिन्होंने 32 की उम्र में Trading शुरू की और आज वो भारत के 17वें अमीर व्यक्ति बन गए हैं । राकेश झुनझुनवाला जिनको भारत की stock market का big bull कहा जाता है, उन्होंने 5000 रुपए से इसकी शुरुवात की और आज उनका Portfolio करीब 6500 करोड़ रुपए है ।
इन 2-3 सालों में stock market में करोड़पति बनने वालों की संख्यां में काफी बढ़ोतरी हुई है ।
शेयर बाज़ार में पैसे कमाने के लिए हमें Stock Analysis के बारे में जानना होगा । 
what is stock analysis ? स्टॉक का विश्लेषण से क्या अभिप्राय है ?


stock analysis से मतलब आने वाले समय में कंपनी के शेयर  की कीमत कम होने या ज्यादा होने से है । इसमें हम stock के fundamental और technical चेक करके यह पता लगा सकते हैं कि stock की भविष्य में कीमत कम होगी या ज्यादा    होगी ।


Stock Analysis के लिए हमें fundamental और technical दोनों की knowledge होनी चाहिए ।

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What mean by Broker? How to invest in share market for Beginners in india ?

SEBI द्वारा एक ऐसा Platform तैयार किया गया जिससे कि आम जनता Exchange के अंदर शेयरों की Trading करवा सके । इस Platform को Broker नाम दिया गया । 
दूसरे शब्दों में, Broker एक फ़र्म होती है जिसकी मदद से हम शेयर को खरीदते हैं और बेचते हैं । ध्यान रहे कम ब्रोकरेज हो जिसकी उसी के पास अपना अकाउंट खुलवाना चाहिए । लेकिन हमें सिर्फ Brokerage की तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए, हमें देखना चाहिए कि उनका Trading Platform कैसा है, उनकी Back up टीम कैसा काम करती है और क्या वो फोन Service देते हैं या नहीं?
गूगल सर्च करके भी ब्रोकर List को देख सकते हैं जो India के शेयर बाजार में Invest करने में आपकी मदद करेंगे । 

अब बात करते हैं How to invest in share market for Beginners in india या How to invest in share market online की - दोस्तों ये दोनों प्रश्न same ही हैं । Invest करने के लिए हमें किसी Broker के पास Account Open करवाना होता है । उसके बाद ये आपको ID और Password दे देते हैं । फिर आप इनकी Application के द्वारा कहीं भी बैठकर Trading या Investment कर सकते हैं । जिस प्रकार आपको Facebook या Whatsapp का ज्ञान हो गया है, उसी तरह आपको इनके Software का भी ज्ञान हो जाएगा, वैसे भी जो आपको Account Open कर के देगा, वो आपको इसके बारे में जरूर बता देगा । इन सभी Broker का Customer Care का नंबर भी होता है । आप उनसे भी सहायता ले सकते हैं । 



अगर आप Zerodha में अपना Account Open करवाना Chahte हैं तो यहाँ Click करें । 


भारत के Top Ten Broking Firm 
               भारत के Top Ten Broking फ़र्म की लिस्ट सभी के अनुसार अलग - अलग होती है क्योंकि यह Invest करने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपने Broker में क्या खासियत चाहता है ।
  • Zerodha        -    20 रुपए प्रति Trade और Delivery Free. पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 
  • Upstox (RKSV) - 20 रुपए प्रति Trade और Delivery Free. पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 
  • Prostocks      -       15  रुपए प्रति Trade, महीने का असीमित प्लान 899 रुपए में और साल का unlimited trading plan 8999 रुपए में । पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 
  • Compositedge    - 20 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ ।
  • TradeSmartOnline- 10 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 
  • My Value Trade - 10 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 
  • Tradejini -            20 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ ।
  • SAMCO -             20 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ ।
  • SAS Online -        09 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ ।
  • RKGlobal -          09 रुपए प्रति Trade .  पूरी जानकारी के लिए कंपनी की website पर जाएँ । 

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    Accounts - Demat Account and Trading Account का क्या फंडा है ?


    शेयर बाजर में Stocks को खरीदने और बेचने तथा अपने Portfolio में Stocks को Hold करके रखने के लिए आपके पास Trading Account और Demat Account दोनों का होना बहुत जरूरी हैं ।

                               

    Trading Account 

    शुरू में बहुत कम लोग शेयर बाजार के बारे में जानते थे । मुंबई जैसे बड़े शहर के लोग ही शेयरों को खरीदते और बेचते  थे । वो लोग एक बरगद के पेड़ के पास इकट्ठे हो जाते थे और कंपनी के शेयरों पर बोलियाँ लगाते थे । अगर खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्ष कंपनी के शेयर की एक निश्चित कीमत पर तैयार हो जाते तो उसके बाद का वो लोग कागज पर लिखकर सहमति पत्र तैयार करते  थे । 
    परंतु धीरे धीरे समय के साथ कागज का काम Electronic तौर पर होने लगा ।  शेयरों की खरीद बिक्री पर जो बोलियाँ लगती थी वो अब एक नए अंदाज में लगने लगी मतलब की Buyer और seller दोनों अपने शेयरों को Computer पर बैठे-बैठे Online ही Buy और Sell करने लगे । लेकिन Online शेयरों की खरीद बिक्री के लिए एक Account की जरूरत पड़ी जिसको हम Trading Account कहते हैं । Trading account के द्वारा हम शेयरों को Buy या Sell कर सकते हैं । यह ट्रेडिंग प्लैटफ़ार्म हमें ब्रोकर देते हैं । ब्रोकर एक संस्था होती है जो शेयरों की खरीद बिक्री के लिए Software देती है ।



    Broker की धोखाधड़ी को रोकने के लिए हमारे देश में एक संस्था है जिसे SEBI (Securities and Exchange Board of India ) कहते हैं । SEBI से registered ब्रोकर की संख्या बहुत ज्यादा है । हमारे देश में दो मुख्य Exchange है जो कि NSE (National Stock Exchange ) तथा BSE (Bombay Stock Exchange ) है । NSE तथा BSE में शेयरों की खरीद बिक्री होती है क्योंकि किसी भी ब्रोकिंग फ़र्म का trader किसी अन्य ब्रोकिंग फ़र्म के trader से buy या sell कर सकता है ।



    Demat Account
    Demat अकाउंट बैंक अकाउंट की तरह ही होता है । इसमें आपके शेयर को रखा जाता है । जब आप एक दिन से ज्यादा शेयर को रखते हैं तो यह अपने आप ही आपके Demat account में चला जाएगा और जब आप शेयर को बेच देते हैं तो यह अपने आप Demat अकाउंट से चला जाएगा । जिस दिन आप कोई Share खरीदते हैं वह T-Day कहलाता है उससे अगला दिन T1 तथा उससे अगला दिन T2 कहलाता है। इस T2 वाले दिन आपके Demat Account में शेयर आते हैं और इसी प्रकार से T2 वाले दिन आपके Demat Account से शेयर जाते हैं ।
     Demat Account की सहायता से ही आप अपने Demat Account में रखे शेयरों को दूसरे के Demat Account में Transfer कर सकते हैं। अगर आपके पास Demat Account नहीं होगा तो आप शेयरों को Transfer नहीं कर सकते । इसका मतलब यह है कि अगर आपके पास Demat Account नहीं है तो आप शेयरों के साथ ट्रेडिंग तो कर सकते हैं लेकिन अगले दिन के लिए नहीं रख सकते । इसलिए शेयरों को अगले दिन या कुछ दिन रखने के लिए Demat Account की जरूरत पड़ती है । 


    मुख्य बातें :


    SEBI - यह कंपनी तथा ब्रोकिंग फ़र्म पर नजर रखती है ताकि trader के साथ किसी भी प्रकार का धोखा न हो । 
    Exchange - यह किसी भी कंपनी के शेयरों की खरीद बिक्री के लिए बीच में एक संस्था होती है । किसी भी कंपनी को शेयरों की खरीद या बिक्री के लिए Exchange में listed या registered होना बहुत जरूरी है । 
    Broker - यह एक संस्था होती है जो trader को शेयरों की खरीद बिक्री के लिए Software provide करती है । Broker के बारे में ज्यादा जानने के लिए आप यहाँ Click कर सकते हैं । 
    Trader - शेयरों की खरीद बिक्री करने वाले व्यक्ति को trader कहते हैं । 
    Share - किसी भी व्यक्ति का कंपनी में एक हिस्सा होता है । इस हिस्से को वह व्यक्ति Price के अनुसार Buy या Sell कर सकता है । यह हिस्सा हमें हमारे Account में एक गिनती के रुप में नजर आता है मतलब कि कंपनी के अंदर हमारे द्वारा लगाए गए पैसे हमें शेयरों की संख्या के रूप में नजर आते हैं । थोड़ा और शेयर के बारे में जानने के लिए यहा Click करें । 






    क्या हम एक से ज्यादा Demat या Trading Account खुलवा सकते हैं?


    जी दोस्तों, आप एक से ज्यादा Demat तथा Trading Account खुलवा सकते हैं । लेकिन अगर आप चाहे तो Demat Account सिर्फ एक रखा जा सकता है । उदाहरण के लिए आपने A नाम की ब्रोकिंग फ़र्म के पास Demat तथा Trading Account दोनों Open करवा लिए । अब आप चाहते हैं किसी दूसरी ब्रोकिंग फ़र्म B के पास अपना Trading Account खुलवाना चाहते हैं बस आपको यह बताना है कि Demat Account मेरे पास पहले है और मैं सिर्फ वही Demat Account रखना चाहता हूँ । लेकिन अगर आप चाहे तो B ब्रोकिंग फ़र्म के पास भी Demat तथा Trading Account दोनों खुलवा सकते हो ।  कई Trader इस झमेले से बचने के लिए दोनों Broking फ़र्म के पास ही Demat तथा Trading Account दोनों खुलवा लेते हैं । 


    एक से ज़्यादा Trading Account का फायदा या नुकसान ? Many Trading Account have Benefit or loss?


    अगर आप अभी अभी शेयर बाजार को सीख रहे हो तो सिर्फ एक ही Trading Account खुलवाईए । अगर आपको शेयर बाजार का Experience हो गया है तो आप इस Post को लगातार पढ़ते रहिए । 
    एक से ज़्यादा Trading Account होने का फायदा यह है कि हम एक Trading Account में सिर्फ उन शेयरों को खरीद कर छोड़ देते हैं जो हमने लंबे समय तक रखने हैं और दूसरे Trading Account से हम हर रोज जो भी Trading करनी है वो कर सकते हैं । अब आप सोच रहे होंगे कि यह दोनों बातें तो हम एक ही Trading Account से भी कर सकते हैं लेकिन दोस्तों यहाँ मैं आपको मेरे अनुभव से बता दूँ कि जब हम एक ही Trading Account से यह सब करते हैं तो जो शेयर हमने लंबे समय के लिए रखा है और हमारी नजर हर रोज उस पर पड़ती है तो हम अपने लालच या डर के कारण उसमें भी ट्रेडिंग कर लेते हैं । इस तरह हम अपने इरादों से पलट जाते हैं । 




    दूसरा सबसे बड़ा फायदा मैं मेरे अनुभव से बता रहा हूँ इसको पुरे ध्यान से पढ़ना । जब हमारे पास एक ही ट्रेडिंग अकाउंट होता है और हमने किसी शेयर को Buy या Sell कर रखा है । कई बार उस ब्रोकिंग फ़र्म का सर्वर Down हो जाता है और इस दौरान हम अपने शेयर की खरीद या बिक्री की Price में कोई बदलाव नहीं कर पाते । इस प्रकार हमें बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है । लेकिन अगर हमारे पास एक से ज़्यादा ट्रेडिंग अकाउंट है तो हम इस नुकसान को कम कर सकते हैं । मान लो हमने किसी शेयर को 180 रुपए के भाव पर खरीद रखा है और ब्रोकिंग फ़र्म A का सर्वर down हो गया । इसी दौरान शेयर की कीमत भी गिरकर 175 रुपए के भाव पर आ जाती है और हम अपने शेयर से निकल नहीं पाते । अगर हमारा दूसरा Trading अकाउंट B ब्रोकिंग फ़र्म के पास होगा तो हम उस B फ़र्म वाले अकाउंट से उसी कंपनी के शेयरों को 175 के भाव पर Sell कर देंगे । ध्यान रहे ये वो शेयर नहीं हैं जो हमने A ब्रोकिंग फ़र्म के ट्रेडिंग अकाउंट में खरीदे थे, ये आपने उसी कंपनी के नए शेयरों को Sell किया है । मतलब कि आपके इस ट्रेडिंग account B में शेयरों के ना होते हुए भी आप बेच रहे हैं तो इसको Short Sell कहते  हैं । इस प्रकार शेयर की Price और भी गिरती है तो हमारा Loss fix हो चुका है । क्योंकि अगर A ट्रेडिंग अकाउंट में हमें Loss हो रहा है तो B ट्रेडिंग अकाउंट में हमें Profit हो रहा है । यह हमने इसलिए किया है ताकि हमारे  पहले वाले ब्रोकिंग फ़र्म A का सर्वर जो डाउन हुआ था ठीक हो जाए और जब server पर कोई Problem नहीं रहती तो आप पहले वाले Trading Account A से शेयरों को Sell कर दें और दूसरे ट्रेडिंग अकाउंट B से शेयरों को Buy कर लें । इस तरह Loss को fix करना Hedging कहलाता है । 
    कई trading account होने  का एकमात्र नुकसान यह है कि जब किसी विशेष दिन उस शेयर की कीमत News के कारण गिर रही है तो हम कई Trading Account एक साथ संभाल नहीं पाते । 


    कितने Trading Account हमारे पास होने चाहिए ? How many trading account should you have ?


    मेरे हिसाब से हमारे पास 3 trading account होने चाहिए । पहला investing के लिए , दूसरा swing trade के लिए तथा तीसरा intraday के लिए । यहाँ मैं आपको बता दूँ यदि आप अभी अभी शेयर बाजार सीख रहें हैं तो सिर्फ एक ही trading account सही है । यह सब आप सीखने के बाद भी खुलवा सकते हैं । 
    Swing Trade का मतलब है कि मैं शेयरों को 5 या 7 दिन के लिए रखना चाहता हूँ और Intraday से मतलब है कि चाहे मुझे शेयरों में फायदा हो या नुकसान उसे आज ही बेचना चाहता हूँ । 
    ध्यान रहे Intraday सिर्फ उसी अकाउंट में करनी चाहिए जो ब्रोकिंग फ़र्म Intraday के लिए कम charge लेती हो । 




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